The mission of the AERB is to ensure the use of ionising radiation and nuclear energy in India does not cause undue risk to the health of people and the environment.

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नैदानिक रेडियोलाजी

नैदानिक रेडियोलाजी में एक्‍स-रे के प्रयोग से विभिन्‍न प्रकार के चित्रण शामिल हैं।

रेडियोलाजी सुविधाओं के नियमन संबंधी जानकारी :
निदान व उपचार के लिये एक्‍स-रे का चिकित्‍सीय उपयोग समाज के लिये काफी लाभप्रद सिद्ध हुआ है। परंतु एक्‍स-रे विकिरण के असुरक्षित उपयोग से स्‍वास्‍थ्‍य को ख़तरा हो सकता है अत: ऐसे उपकरणों के पूरे जीवन-काल (निर्माण, आपूर्ति, स्‍थापना, प्रयोग, अनुरक्षण, सर्विसिंग तथा विकमीशनन) के दौरान सावधानी बरतना आवश्‍यक है। परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के अंतर्गत बनाये गये परमाणु ऊर्जा (विकिरण संरक्षण) नियम, 2004 [एई (आरपी) आर-2004], विकिरण जनक उपकरणों (यहां के संदर्भ में एक्‍स-रे उपकरण) के संरक्षित प्रहस्‍तन के लिये कानूनी आधार प्रदान करते हैं। एई (आरपी) आर-2004 के नियम क्र. 3 के अनुसार एक्‍स–रे उपकरणों के निर्माताओं/आपूर्तिकर्ताओं/प्रयोक्‍ताओं के लिये उपर्युक्‍त गतिविधियां संपन्‍न करने के लिये एईआरबी से लायसेंस प्राप्‍त करना अनिवार्य है।

Courtesy: Google Images

विभिन्‍न नियामक अनुमतियों को आन-लाइन प्रेषित करने के लिये एईआरबी ने e-LORA (e-Licensing of Radiation Applications) तंत्र शुरू किया है। एक्‍स-रे उपकरणों के निर्माता/ आपूर्तिकर्ता/ सर्विस एजेंसियां तथा एक्‍स-रे संस्‍थापन इस तंत्र के माध्‍यम से सभी आवश्‍यक अनुमतियां प्राप्‍त कर सकते हैं। e-LORA के प्रथम पृष्‍ठ पर सभी रूचि धारकों के लिये विस्‍तृत दिशानिर्देश उपलब्‍ध हैं।

एईआरबी ने बिना वैधानिक लायसेंस प्राप्‍त किये नैदानिक एक्‍स-रे उपकरणों के अनधिकृत निर्माण, आपूर्ति तथा प्रयोग को गंभीरता से लिया है तथा ‘चेतावनी’ जारी की है कि ऐसी सुविधाओं को बिना किसी अन्‍य नोटिस के तुरंत बंद कर दिया जायेगा।

जनता को भी निवेदन किया जाता है कि अपनी सुरक्षा के लिये वे केवल लायसेंसीकृत सुविधाओं का ही प्रयोग करें। सभी विकिरण सुविधाओं के लिये एईआरबी के लायसेंस की प्रति अपनी सुविधा में प्रमुख स्‍थान पर लगाना आवश्‍यक है।

देशभर में एक्‍स-रे सुविधाओं की विशाल संख्‍या को देखते हुए एईआरबी ने प्रदेशों के स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण विभागों के अंतर्गत विकिरण संरक्षा निदेशालय बनाने के लिये कदम उठाये हैं। ये निदेशालय प्रदेश की एक्‍स-रे सुविधाओं का नियामक निरीक्षण करेंगे तथा एईआरबी से लायसेंस प्राप्‍त करने में उनकी सहायता करेंगे। ऐसा पहला निदेशालय केरल में 1999 में स्‍थापित किया गया। आज केरल के अतिरिक्‍त मिज़ोरम, छत्‍तीसगढ़, त्रिपुरा, अरूणाचल प्रदेश तथा पंजाब में ये निदेशालय कार्यरत हैं।

देश में नियमन के प्रभावी लागूकरण के लिये नियामक गतिविधियों के विकेंद्रीकरण के अतिरिक्‍त एईआरबी ने चेन्‍नई, कोलकाता तथा दिल्‍ली में क्रमश: दक्षिणी, पूर्वी व उत्‍तरी क्षेत्रों के लिये क्षेत्रीय नियामक केन्‍द्र स्‍थापित किये हैं।

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